Saturday, March 31, 2012
Saturday, March 24, 2012
भक्तों का कल्याण करने के लिये माता नौ रुपों में प्रकट हुई. इन नौ रुपों में से नवम रुप माता सिद्धिदात्री का है. यह देवी अपने भक्तोम को सारे जगत की रिद्धि सिद्धि प्रदान करती है. माता के इन नौ रुपों की न केवल मनुष्य बल्कि देवता, ऋषि, मुनि, सुर, असुर, नाग सभी उनके आराधक है. माता सिद्धिदात्री अपने भक्तों के रोग, संताप व ग्रह बधाओं को दुर करने वाली कही गई है.
इस प्रकार नवरात्रों के नौ दिनों में माता के अलग अलग रुपों की पूजा की जाती है.
माता का आंठवा रुप माता महागौरी का है. एक पौराणिक कथा के अनुसार शुभ निशुम्भ से पराजित होने के बाद गंगा के तट पर देवता माता महागौरी की पूजा कर रहे थे, और राक्षसों से रक्षा करने की प्रार्थना कर रहे थे, इसके बाद ही माता का यह रुप प्रकट हुआ और देवताओं की रक्षा हुई. इस माता के विषय में यह मान्यता है कि जो स्त्री माता के इस रुप की पूजा करती है, उस स्त्री का सुहाग सदैव बना रहता है. कुंवारी कन्या पूजा करें, तो उसे योग्य वर की प्राप्ति होती है. साथ ही जो पुरुष माता के इस रुप की पूजा करता है, उसका जीवन सुखमय रहता है. माता महागौरी अपने भक्तों को अक्षय आनन्द ओर तेज प्रदान करती है.
तापसी गुणों स्वरुपा वाली मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. माता के सांतवें रुप को माता कालरात्रि के नाम से जाना जाता है. देवी का यह रुप ऋद्धि व सिद्धि प्रदान करने वाला कहा गया है. यह तांत्रिक क्रियाएं करने वाले भक्तों के लिये विशेष कहा गया है. दुर्गा पूजा मेम सप्तमी तिथि को काफी महत्व दिया गया है. इस दिन से भक्त जनों के लिये देवी मां का दरवाजे खुल जाते है. और भक्तों की भीड देवी के दर्शनों हेतू जुटने लगती है.
माता का छठा रुप माता कात्यायनी के नाम से जाना जाता है. ऋषि कात्यायन के घर जन्म लेने के कारण इनका नाम कात्यायनी पडा. माता कात्ययानी ने ही देवी अंबा के रुप में महिषासुर का वध किया था. नवरात्रे के छठे दिन इन्हीं की पूजा कि जाती है. इनकी पूजा करने से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
**पंचमी तिथि को माता स्कन्द देवी की पूजा की जाती है. नवरात्रे के पांचवे दिन कुमार कार्तिकेय की माता की पूजा भी की जाती है. कुमार कार्तिकेय को ही स्कन्द कुमार के नाम से भी जाना जाता है. इसलिये इस दिन कुमार कार्तिकेय की माता की पूजा आराधना करना शुभ कहा गया है. जो भक्त माता के इस स्वरुप की पूजा करते है, मां उसे अपने पुत्र के समान स्नेह करती है. देवी की कृ्पा से भक्तों की मुराद पूरी होती है. और घर में सुख, शान्ति व समृ्द्धि वृ्द्धि होती है. **
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