Friday, December 30, 2011

by sushil

शीत ने अपने पांव पसारे
छुए वर्ष ने फिर से किनारे

वर्ष 2011 की समापन घड़ियों में
मेरी ओर से आप सब को
वर्ष 2012 के लिए हार्दिक शुभकामनाएं और मंगलकामनाएं !

**noontan varshabhinandan**

नए वर्ष में नई पहल हो।
कठिन ज़िंदगी और सरल हो।।

अनसुलझी जो रही पहेली।
अब शायद उसका भी हल हो।।

जो चलता है वक्त देखकर।
आगे जाकर वही सफल हो।।

नए वर्ष का उगता सूरज।
सबके लिए सुनहरा पल हो।।

समय हमारा साथ सदा दे।
कुछ ऐसी आगे हलचल हो।।

सुख के चौक पुरें हर द्वारे।
सुखमय आँगन का हर पल हो।।

Thursday, December 29, 2011

पक्षपात ही सब अनर्थों का मूल है, यह न भूलना। अर्थात् यदि तुम किसी के प्रति अन्य की अपेक्षा अधिक प्रीति-प्रदर्शन करते हो, तो याद रखो उसीसे भविष्य में कलह का बिजारोपण होगा।
मन का विकास करो और उसका संयम करो, उसके बाद जहाँ इच्छा हो, वहाँ इसका प्रयोग करो–उससे अति शीघ्र फल प्राप्ति होगी। यह है यथार्थ आत्मोन्नति का उपाय। एकाग्रता सीखो, और जिस ओर इच्छा हो, उसका प्रयोग करो। ऐसा करने पर तुम्हें कुछ खोना नहीं पड़ेगा। जो समस्त को प्राप्त करता है, वह अंश को भी प्राप्त कर सकता है। sw.vi.
मानव-देह ही सर्वश्रेष्ठ देह है, एवं मनुष्य ही सर्वोच्च प्राणी है, क्योंकि इस मानव-देह तथा इस जन्म में ही हम इस सापेक्षिक जगत् से संपूर्णतया बाहर हो सकते हैं–निश्चय ही मुक्ति की अवस्था प्राप्त कर सकते हैं, और यह मुक्ति ही हमारा चरम लक्ष्य है।
Sweetness in ur speech,

Talent in ur mind,

Love in ur heart,

Peace in ur eyes,

Strength in ur hands,

And

I wish always HAPPINESS in ur life
M-ake the most of it.
O-pen your heart and mind.
R-emember to thank God.
N-ever frown
I-magine me
N-othing to worry.
G-ood Morning!